गोंडी संस्‍कृति

गोंडी, गोंड या कोइतूर एक भारतीय जनजातीय समूह हैं। वे भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक हैं। वे मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, विदर्भ, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार और ओडिशा राज्यों में फैले हुए हैं। उन्हें भारत की सकारात्मक भेदभाव की प्रणाली के उद्देश्य से अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वे भारत के एक मूलनिवासी समूह हैं। 

गोंड को राज गोंड के नाम से भी जाना जाता है। इस शब्द का व्यापक रूप से उपयोग 1950 के दशक मे किया गया था, लेकिन गोंड राजों के राजनीतिक ग्रहण के कारण, अब यह लगभग अप्रचलित हो गया है। इनकी अपनी गोंडी भाषा है, जो द्रविड़ी भाषा परिवार से है। 

2011 की भारत की जनगणना में लगभग 2.98 मिलियन गोंडी भाषी दर्ज किए गए। 1971 की जनगणना के अनुसार, उनकी आबादी 5.01 मिलियन थी। 1991 की जनगणना तक यह बढ़कर 9.3 मिलियन हो गई और 2001 की जनगणना तक यह आंकड़ा लगभग 11 मिलियन हो गया। पिछले कुछ दशकों से वे मध्य भारत में नक्सली-माओवादी विद्रोह के गवाह रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की अगुवाई में  गोंड लोगों ने नक्सली विद्रोह से लड़ने के लिए एक सशस्त्र उग्रवादी समूह सलवा जुडूम का गठन किया। 

संशोधकों का मानना ​​है कि, इ. स. 14 से इ. स. 19 के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी ओडिशा में, गोंडों ने गोंडवाना में शासन किया। मुस्लिम लेखकों ने 14 वीं शताब्दी के बाद गोंड राज्य के उदय का वर्णन किया। गोंड शासको ने 16 वीं और 18 वीं शताब्दी के बीच मध्य भारत के चार राज्यों अर्थात, गढ मंडला, देवगढ़, चांदा और खेरला में शासन किया। रानी दुर्गावती ने इ. स.1550 से अपनी मृत्यु तक इस क्षेत्र पर शासन करती रही हैं। उन्होंने गोंड वंश के शासन के दौरान कीलों, महलों, मंदिरों, टैंकों और झीलों का निर्माण किया। गोंडवाना राज्य 16 वीं शताब्दी के अंत तक रहा।